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Prabhat Vishes

  • Apr 5 2015 4:55AM

परीक्षा को कदाचारमुक्त बनाना सरकार की जिम्मेवारी

पिछले दिनों बोर्ड परीक्षा में नकल का मामला प्रकाश में आने से पूरे देश में बहस शुरू हो गयी है. नकल से जुड़ा मुद्दा हर शिक्षक, अभिभावक व विद्यार्थी के लिए  चिंता का विषय है. इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि नकल के बूते परीक्षा पास करनेवाले विद्यार्थियों का क्या भविष्य होगा. ये कैसे समाज का गठन करेंगे.
 
 मूल सवाल यह है कि आखिर नकल करनी ही क्यों पड़ती है? कहीं हमारी शिक्षा व्यवस्था में तो खामी नहीं है. इन्हीं सब बातों/ सवालों को हमने इस विशेष श्रृंखला नकल पर नकेल में समेटने का प्रयास किया है. इसी कड़ी में हमने प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बात की. उन्होंने कहा कि नकल छोटी समस्या नहीं है. कदाचार मुक्त परीक्षा के लिए सिस्टम को दुरुस्त करना होगा.
 
पॉलिटिकल एजेंडा तो बनना ही चाहिए : कांग्रेस
 
इस तरह के मसले को भी पॉलिटिकल पार्टियों को एजेंडा बनाना चाहिए. यह हमारे भविष्य का सवाल है. सरकार से लेकर राजनीतिक दलों के लिए यह प्राथमिकता की सूची में होनी चाहिए. नकल छोटी समस्या नहीं है. पूरी व्यवस्था ध्वस्त है. कदाचार मुक्त परीक्षा के लिए सिस्टम को दुरुस्त करना होगा. इस समस्या को लेकर सामाजिक स्तर पर भी जागरूकता की जरूरत है. इसके खिलाफ हर मोरचे पर डटने की जरूरत है. सरकार को जवाबदेही निभानी होगी.
 
-सुखदेव भगत, प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस
 
झारखंड की नहीं है समस्या : झाविमो
 
परीक्षाओं में नकल झारखंड की समस्या नहीं रही है. राजनीतिक दल उसे ही एजेंडा बनाते हैं, जो राज्य की ज्वलंत समस्या होती है. एकीकृत बिहार के जमाने में झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्र में कहीं-कहीं नकल होती थी.  परीक्षाओं को कदाचारमुक्त बनाना सरकार की जिम्मेवारी है. ऐसे में जब झारखंड में नकल की समस्या नहीं है, तो उसे राजनीतिक एजेंडा बनाने जैसी कोई बात नहीं है.  छात्रों का पलायन रुके इसके लिए हमारी पार्टी ने चुनाव के समय कई घोषणाएं और कार्य योजना को जनता तक जरूर पहुंचाया है.
 
- प्रदीप यादव, झाविमो के महासचिव
 
स्वच्छ शैक्षणिक व्यवस्था एजेंडा हो : जदयू
 
परीक्षाएं स्वच्छ होनी चाहिए. नकल की संस्कृति पर रोक लगना चाहिए. इससे शैक्षणिक वातावरण खराब होता है. मैं खुद शिक्षाविद हूं, मेरी मान्यता है कि परीक्षाओं को लेकर कड़े मापदंड अपनाने चाहिए. इससे छात्रों का भी भला है. हमारी पार्टी भी इससे सहमत है. हमारी पार्टी स्वच्छ शैक्षणिक माहौल को एजेंडा बनाते रहती है. समाज में एक अच्छा वातावरण बने यह हमारे एजेंडा में है. नकल पर रोक के लिए राजनीतिक दलों को भी आगे आना होगा. देश-राज्य के भविष्य का सवाल है.
 
- जलेश्वर महतो, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष
 
राजनीति नहीं, सामाजिक एजेंडा भी बने : राजद
 
परीक्षाओं में नकल की संस्कृति से शिक्षा में गिरावट आ रही है. इस पर नकेल लगे, यह केवल राजनीतिक दलों का एजेंडा बनाने से नहीं होगा. इसे सामाजिक एजेंडा बनाने की जरूरत है. समाज का दायित्व है कि ऐसी गलत परंपरा रुके. अभिभावक को सोचना होगा कि नकल कर बच्चे को पढ़ा कर कैसा भविष्य दे रहे हैं. यह सवाल समाज के अंदर उठना चाहिए. यह एक सामाजिक विकृति है. झारखंड के शहरी इलाके तो नहीं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह विकृति आयी है. ग्रामीण अंचल में परीक्षाओं को कदाचार मुक्त बनाने की जरूरत है.
 
-गिरिनाथ सिंह, राजद के प्रदेश अध्यक्ष
 
शिक्षा में व्यापक सुधार की जरूरत : माले
 
सरकार ने शिक्षा के स्तर को जिस तरह से नीचा किया है, नकल उसका एक नमूना है. शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के बजाय सरकार केवल औपचारिकता पूरा करती है. शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक किस्म से सरकारी साजिश चल रही है. छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. इसमें व्यापक सुधार की जरूरत है. यह केवल परीक्षार्थियों से जुड़ा मामला नहीं है. नि:संदेश यह राजनीति दलों के लिए एजेंडा होना चाहिए. हमारी पार्टी ऐसे मुद्दे उठाती रही है.
 
- जनार्दन प्रसाद, माले के राज्य सचिव
 
समाज की भी है जवाबदेही : आजसू
 
सरकार और प्रशासन को सुनिश्चित करना है कि कदाचार मुक्त परीक्षा हो. झारखंड में यह रोग कम है. कहीं होता भी है, तो उसे रोकने की जरूरत है. नकल के खिलाफ सामाजिक रूप से चेतना लाने की भी जरूरत है. कई बार देखा गया है कि नकल को अभिभावक बढ़ावा देते हैं. राजनीतिक दलों की भी जवाबदेही बनती है कि इसके खिलाफ समाज के अंदर वातावरण बनाये. शैक्षणिक स्तर पर सुधार की जरूरत है. हमारी पार्टी स्वच्छ और गुणवत्ता युक्त शिक्षा व्यवस्था की पक्षधर रही है.
 
-डॉ देवशरण भगत, आजसू प्रवक्ता
 
सामाजिक पहल की भी है जरूरत : भाजपा
 
समाज में नकल एक गंभीर विषय है. इस पर रोकथाम लगाना जरूरी है. राजनीतिक दलों को इसे एजेंडा बनना चाहिए. जिस प्रकार से बिहार सरकार ने इस मुद्दे पर अपना पल्ला झाड़ लिया है, यह दर्शाता है कि उसकी नेतृत्व क्षमता में कहीं न कहीं कमी है. छात्र देश के भविष्य हैं. नकल से हुनरमंद छात्रों का हक मारा जाता है. जहां तक सरकार की बात है, तो उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि परीक्षा में किसी प्रकार का कदाचार नहीं हो. वहीं, समाज और अभिभावकों को भी आगे बढ़ कर इस पर रोक लगाने की पहल करनी चाहिए.
 
-प्रदीप सिन्हा, भाजपा प्रवक्ता
 
समाज में जागरूकता लानी होगीे : झामुमो
 
युवा हमारे देश के भविष्य हैं. इनमें नकल की संस्कृति पैदा होना, समाज के लिए घातक है. यह केवल राजनीतिक एजेंडा नहीं है. नकल रोकने के लिए सबसे पहले समाज में जागरूकता लानी होगी. इसमें सुधार लाने के लिए वर्तमान शिक्षा प्रणाली की व्यवस्था में सुधार लाना होगा.  बच्चे सबसे ज्यादा बातें अपने घर से सीखते हैं. ऐसे में अभिभावकों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए. प्रतिस्पर्धा के इस दौर में सिर्फ नकल कर हम अपना वजूद नहीं बचा सकते हैं.
-विनोद पांडेय, झामुमो प्रवक्ता
 

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