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Prabhat Vishes

  • Apr 3 2015 6:18AM

शिक्षा क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं मुहैया करायें

पिछले दिनों बोर्ड परीक्षा में नकल के मामले से अंतरराष्ट्रीय पटल पर बहस शुरू हो गयी है. नकल से जुड़ा मुद्दा हर शिक्षक, अभिभावक व विद्यार्थी के लिए  चिंता का विषय है. इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि नकल के बूते परीक्षा पास करनेवाले विद्यार्थियों का क्या भविष्य होगा.

मूल सवाल है कि आखिर चोरी करनी ही क्यों पड़ती है? कहीं हमारी शिक्षा व्यवस्था में तो खामी नहीं है. इन्हीं सब बातों/ सवालों को हमने इस विशेष श्रृंखला नकल पर नकेल में समेटने का प्रयास किया है. इसी कड़ी में राज्य के विभिन्न विद्यार्थी संगठनों के प्रतिनिधियों से नकल की समस्या पर राय ली गयी. इनका कहना है कि परीक्षा में नकल पर रोक लगाने के लिए शिक्षा जगत को जागरूक करने की जरूरत है. शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं मुहैया करानी होगी.

प्रशासन की लापरवाही से मिलता है प्रोत्साहन

परीक्षा में नकल एक अभिशाप बन गया है. नकल रोकने के लिए सबसे पहले समाज में जागरूकता लानी होगी. समाज पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है. विद्यार्थियों को समझना होगा कि नकल से वह वर्तमान दौर की प्रतियोगिता में पिछड़ जायंगे. उनका भविष्य अंधकारमय हो जायेगा. नकल रोकने के लिए छात्र संगठनों को आगे आना चाहिए. अब तक कहीं भी छात्र संगठन का ध्यान इस ओर नहीं गया है. इसके लिए संघ के प्रतिनिधियों को छात्रों के बीच जाकर नकल का विरोध करना होगा.

साथ ही उनको जागरूक करने का काम भी करना होगा. स्कूल-कॉलेज में नियमित कक्षाएं हो. इसके लिए भी संगठन को आगे आना होगा. शिक्षक व अभिभावकों को भी अपने विद्यार्थियों व बच्चों पर ध्यान देना होगा. देखना होगा कि वे ढंग से पढ़ाई कर रहे हैं या नहीं. शिक्षकों को भी अपने विषय को गहराई से समझाने की जरूरत है, ताकि विद्यार्थियों को नकल करने की जरूरत ही नहीं पड़े. 

परीक्षा केंद्रों पर प्रशासनिक लापरवाही के कारण ही नकल को प्रोत्साहन मिलता है. प्रशासनिक ढील के कारण यदि एक छात्र भी नकल करता है, तो उसे देखकर अन्य भी नकल करने लगते हैं. ऐसी स्थिति में नकल पर लगाम नहीं लग पाता. इसलिए सिस्टम के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था को भी दुरुस्त करना होगा. छात्र संगठनों को इसके लिए आगे आना होगा. व्यवस्था को बनाने के लिए सभी को सहयोग देना होगा.        

हरीश कुमार, आजसू संयोजक

समस्याओं को दूर कर रोक सकते हैं नकल

नकल क्यों हो रहा है. इसकी गहराई में जाना होगा. हमारे सिस्टम में ही गड़बड़ी है या फिर छात्रों के लिए यह मजबूरी हो गयी है. मेरे ख्याल से सिस्टम में भी गड़बड़ी है और वर्तमान शैक्षणिक स्थिति ने विद्यार्थियों को नकल करने के लिए मजबूर भी कर दिया है. सही ढंग से कक्षाएं नहीं हो रही हैं. शिक्षक भी आनन-फानन में पढ़ाते हैं. नियमित कक्षाएं भी नहीं लेते. 

परीक्षा के समय छात्र नकल कर पास होने के लिए हर तरह का हथकंडा अपनाते हैं. इसे रोकने के लिए बुनियादी समस्याओं को दूर करना होगा. कक्षाएं नियमित हो, स्कूल-कॉलेज में आधारभूत संरचना हो. शिक्षक नियमित कक्षाएं लें और छात्र भी नियमित रूप से उपस्थित रहें, तभी इस समस्या का हल निकलेगा. छात्र संगठन हमेशा इन मुद्दों को लेकर आंदोलन करता रहा है. अगर ये सब ठीक हो जायें, तो नकल पर रोक लग सकती है. प्रशासनिक व्यवस्था दुरुस्त रहे, तो नकल करनेवाले भी डरेंगे. 

छात्र संगठन छात्रों व अभिभावकों को जागरूक करने का काम करें. सिस्टम में बैठे हर कोई अगर अपने कर्तव्य निभायें, प्रशासन सही ढंग से मॉनिटरिंग करे, तो नकल पर लगाम लग सकती है. अभी देखा जा रहा है कि छात्र संगठन जायज मांगों को लेकर भी आंदोलन करते हैं, तो इच्छाशक्ति के अभाव में उच्च पदों पर बैठे व्यक्ति इससे अपना पल्ला झाड़ ले रहे हैं. स्कूल-कॉलेज में शिक्षकों की कमी है. शिक्षक व छात्र अनुपात असामान्य हो गया है. इन सब चीजों को दुरुस्त किया जाये, तो सुधार हो सकता है.

कुमार रौशन, एनएसयूआइ

छात्रों को जागरूक करने का काम करें संगठन 

विद्यार्थी जब पढ़ाई नहीं करेंगे, तो वह नकल का सहारा लेकर परीक्षा पास करने का प्रयास करेंगे. इस कार्य में शिक्षक भी साथ देते हैं. अभिभावक भी चाहते हैं कि उनका बच्च फेल न होने पाये. अगर सभी नकल कर रहे हैं, तो वह भी कर रहा है. इस मानसिकता के कारण ही समाज भी नकल पर नकेल नहीं लगा पा रहा है. सबसे पहले संस्थानों में नियमित कक्षाएं हों, शिक्षकों के रिक्त पद भरे जायें.

जब शिक्षक ही नहीं रहेंगे, तो कक्षा कैसे चलेगी. कक्षा नहीं चलेगी, तो विद्यार्थी विषय को कैसे समङोंगे. सही मायने में सिलेबस के अनुरूप पढ़ाई पूरी नहीं हो पा रही है. स्कूल, कॉलेज से लेकर तकनीकी संस्थानों में भी यही हालात हैं. शिक्षक की कमी हर जगह है. छात्र संगठन का फर्ज बनता है कि वह इस समस्या के निदान के लिए सरकार का ध्यान आकृष्ट कराये.  मेरा संगठन इस ओर बराबर सरकार का ध्यान आकृष्ट करा रहा है. विद्यार्थियों को जागरूक करने की भी आवश्यकता है.

उनको बताना होगा कि नकल करने से वे आगे नहीं बढ़ नहीं सकत. सिर्फ डिग्री हासिल कर सकते हैं. प्रतियोगिता में चयनित नहीं हो सकते. संस्थानों के प्रैक्टिकल लैब में उपकरण तक नहीं हैं. बिना प्रैक्टिकल किये विद्यार्थी परीक्षा में बैठ जा रहे हैं. ऐसे में वे नकल तो करेंगे ही, शिक्षक इसलिए साथ देते हैं कि फेल हो जाने पर उनकी बदनामी होती है. छात्र संगठन इसे अभियान के रूप में ले और नकल पर रोक लगाने के लिए विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक, प्रशासन, समाज व मॉनिटरिंग करनेवाले प्रशासनिक अधिकारियों को जागरूक करें.

एस अली, झारखंड छात्र संघ

स्कूल-कॉलेज में शैक्षणिक माहौल बनायें

नकल पर नकेल तो लगनी ही चाहिए. नकल से विद्यार्थी क्षणिक लाभ तो प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन भविष्य के लिए वे अनुपयुक्त हो जाते हैं. स्कूल-कॉलेज में शैक्षणिक महौल बनाये बिना इस पर अंकुश लगाना संभव नहीं है. कक्षा में विद्यार्थी रहते हैं, तो भी शिक्षक नहीं होते. शिक्षकों की भारी कमी भी है. ऐसे में सिलेबस तक पूरा नहीं हो पाता.

मजबूरन परीक्षा में विद्यार्थियों को नकल करनी पड़ती है.  शिक्षक भी इसलिए खुली छूट दे रहे हैं, कि वे भी जानते हैं कि पढ़ाई हुई ही नहीं है, तो क्यों रोकें. अभिभावक भी अपने बच्चों पर ध्यान नहीं दे पाते. विवि भी अब सिर्फ डिग्री देने का काम कर रहा है. गुणवत्तायुक्त शिक्षा पर ध्यान नहीं दे रहा है. एमबीए तक के विद्यार्थी नकल कर रहे हैं. मेरा संगठन इसका विरोध करता रहा है. अभी भी समाज में जागरूकता की कमी है. जब तक समाज ऐसी बातों का बहिष्कार नहीं करेगा, तब तक रोक लगाना संभव नहीं है.

शिक्षकों की नियुक्ति करने की दिशा में सरकार को गंभीर होना होगा. प्रतियोगिता के इस दौर में शिक्षकों की नियुक्ति में भी गुणवत्ता आनी चाहिए, ताकि वे विद्यार्थियों को किसी भी विषय पर गहराई से समझा सकें, जिससे नकल करने की नौबत ही नहीं आये. प्रशासनिक क्षमता को भी विकसित करनी होगी. परीक्षा प्रणाली में सुधार लाने की आवश्यकता है. उनका संगठन हमेशा ऐसे मुद्दों को लेकर आंदोलन करता रहा है और करता रहेगा.

अटल पांडेय, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद

 

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