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Economy

  • May 19 2017 12:25PM

जीएसटी में टेलीफोन बिल और इंश्योरेंस की पॉलिसी पर टैक्स की दरें होंगी सस्ती, जानिये क्यों...?

जीएसटी में टेलीफोन बिल और इंश्योरेंस की पॉलिसी पर टैक्स की दरें होंगी सस्ती, जानिये क्यों...?

नयी दिल्ली : वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) परिषद की ओर से जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में आयोजित दो दिवसीय बैठक में वस्तुओं की नयी दरों को तय करने को लेकर मंथन चल रहा है. वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में गुरुवार को परिषद की हुई बैठक में 29 राज्यों के प्रतिनिधियों के द्वारा अब तक करीब 1205 वस्तुओं के लिए कर की नयी दरों को तय कर लिया गया है. परिषद की ओर से शुक्रवार को फाइनेंशियल सर्विसेज, टेलीकॉम सेक्टर समेत करीब छह सेक्टरों के लिए नयी दरों को तय किया जायेगा.

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सूत्रों का कहना है कि यदि बैठक में केंद्र सरकार की चली, तो टेलीफोन के बिल और इंश्योरेंस प्रीमियम को कम रखने के लिए टेलीकॉम सेक्टर और फाइनेंशियल सर्विसेज कर की सबसे निचली दर पांच फीसदी रखी जा सकती है. इन दोनों क्षेत्रों के लिए कर की सबसे निचली दर तय करने से टेलीफोन पर बात करना सस्ता और इंश्योरेंस पॉलिसी की प्रीमियम देना आसान हो जायेगा.

गौरतलब है कि जीएसटी परिषद ने श्रीनगर में आयोजित अपनी 14वीं बैठक में अब तक 1205 वस्तुओं पर लगने वाले कर की दरों को तय कर दिया है, जिसमें अनाज, क्रीम, केश तेल, बीड़ी आदि को कर की सबसे निचले स्तर पर रखा है. वहीं, पूजा की सामग्रियों को कर की दर के दायरे से बाहर रखा है. वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में 29 राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ हो रही दो दिवसीय बैठक में वस्तुओं की दरों को दो स्तर 12 और 18 फीसदी तक तय करने की संभावना जाहिर की जा रही थी.

सूत्रों का कहना है कि यदि जीएसटी की बैठक में टेलीकॉम सेक्टर और फाइनेंशियल सर्विसेज के लिए कर की सबसे निचली दर पांच फीसदी को तय किया जाता है, तो लोगों को टेलीफोन का बिल और इंश्योरेंस पॉलिसी की प्रीमियम में किसी प्रकार की बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ेगा.

हालांकि, जीएसटी परिषद ने गुरुवार को हुई बैठक में कर की दरों को 5 फीसदी, 12 फीसदी, 18 फीसदी और 28 फीसदी तक रखने को लेकर अपनी सहमति जाहिर कर दी है. जीएसटी दरों को लेकर परिषद की ओर से किये गये फैसले में मनोरंजन एवं विलासिता की वस्तुओं जैसे कार, सिगरेट, पान मसाला, सॉफ्ट ड्रिंक और कोयले पर उपकर लगाने का भी प्रावधान किया गया है.

राज्य सरकार के अधिकारियों का कहना है कि जीएसटी दरों को लेकर बहुत ही जटिल प्रस्ताव को पेश किया गया था, जिसे परिषद की ओर से आसान किया गया है. उनका कहना है कि बहुतायत में उपयोग किये जाने वाले रासायनिक उर्वरकों जैसे उत्पादों पर उसके उपयोग के आधार पर कर की दरों को तय करने का फैसला किया गया है, जबकि राज्यों के लोग कुछ और मांग कर रहे थे.

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