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devgarh

  • Apr 21 2017 2:04PM

शराबबंदी इफेक्ट : झारखंड में कहीं नदी पार कर आते हैं लोग, तो कहीं लाइन होटलों में लगती है भीड़

शराबबंदी इफेक्ट : झारखंड में कहीं नदी पार कर आते हैं लोग, तो कहीं लाइन होटलों में लगती है भीड़

बिहार में नशेबंदी का अजीबोगरीब असर झारखंड में देखा जा रहा है. सीमावर्ती जिलों में शराब का कारोबार हर रोज फलता-फूलता नजर आ रहा है. सीमावर्ती जिलों के होटलों में भीड़ बढ़ गयी है. लाइन होटल के मालिक इन शराबियों से मनमानी कीमत वसूल रहे हैं. कोडरमा में आधी शराब दुकानों के ठेके बिहार के ही व्यापारियों ने ले लिया है. वहीं, गोड्डा और देवघर इलाके में तेजी से खुल रहे शराब की नयी दुकानों को लेकर महिलाओं ने विरोध-प्रदर्शन किया है. कल महगामा के महारा में शराब दुकानों का विरोध करने महिलाएं सड़क में उतरीं. 

उत्पाद विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सीमावर्ती जिले गिरिडीह, चतरा व देवघर में पिछले वर्ष की तुलना में शराब की खपत बढ़ी है. गिरिडीह में अप्रैल 2015 के मुकाबले 2016 में 20 हजार लीटर की खपत बढ़ी है. चतरा  में चार हजार और देवघर में पांच हजार लीटर की वृद्धि दर्ज की गयी है. वहीं, विभागीय सूत्रों के अनुसार, सीमावर्ती जिलों के अलावा शेष जिलों में विदेशी शराब की खपत में पांच हजार लीटर व देसी शराब की खपत में दो लाख लीटर की कमी हुई है.
गढ़वा में बिहार के लोग नदी पार कर आ रहे हैं शराब पीने 
 
गढ़वा जिले में शराब की खपत बढ़ गयी है. गढ़वा जिले को बिहार के रोहतास जिले से सोन नदी अलग करती है. बिहार के लोग नदी पार कर यहां शराब पीने पहुंच रहे हैं. गढ़वा का कांडी, खरौंधी व केतार प्रखंड बिहार से सटा हुआ है. यहां प्रतिदिन बिहार से लोग शराब पीने आ रहे हैं. इन क्षेत्रों में  एक दर्जन से अधिक शराब के नये अवैध अड्डे  शुरू हो गये  हैं.  दोपहर में भी भीड़ लगती है. 

चौपारण लाइन होटलों में लगती है शराबियों की भीड़
 
शाम होते ही यहां के लाइन होटलों में शराबियों की भीड़ लगती है. होटल मालिक भी मनमानी कीमत वसूल रहे हैं.  प्रखंड में  दर्जनों अवैध देसी महुआ शराब की भट्ठियां खुल गयी हैं. यहां से अवैध शराब चोरी-छिपे जंगल के रास्ते बिहार भेजी जा रही है. दैहर, चोरदाहा, यवनपुर, चौपारण, करमा, पड़रिया, बसरिया, रामपुर व बेला पंचायत के विभिन्न गांवों में भी अवैध रूप से देसी शराब बनाने का धंधा चल रहा है. 
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